Tamatar Ki Kheti: कब और कैसे करें टमाटर की खेती, जानें रोग व खेती करने का तरीका

टमाटर की खेती (Tamatar Ki Kheti):  भारत के बाजारों में वर्षभर टमाटर की मांग रहती है, क्यूंकि यह लोगों के बीच सबसे पसंदीदा सब्जियों में से एक है। हमारे स्वास्थ्य के लिए भी यह काफी जरूरी है, इसमें विटामिन, कैल्शियम, आयरन समेत अन्य तत्वों की उचित मात्रा पाई जाती है। बाज़ार में टमाटर काफी कम दाम में मिलते हैं, तो कभी अचानक इसके दाम आसमान छूने लगते हैं। कई किसान टमाटर की उन्नत खेती (Tamatar Ki Kheti) कर इससे अच्छी कमाई करते हैं, लेकिन कुछ किसानों को अब भी टमाटर की खेती करने का सही तरीका नहीं पता। सही खेती करने पर आपको उच्च गुणवत्ता के टमाटर प्राप्त होंगे, जिन्हें आप बाज़ार में ऊंचे दाम पर बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। जो लोग नए-नए खेती-किसानी के क्षेत्र में आते हैं उनके मन में इस सब्जी की खेती को लेकर कई सवाल रहते हैं। जैसे टमाटर की खेती कब की जाती है (Tamatar Ki Kheti Kaise Karen), इसकी खेती कैसे करें, कौन-कौन से रोग टमाटर की खेती (Tomato Ki Kheti) को प्रभावित करते हैं, टमाटर की कितने प्रकार की किस्म होती है? आइए टमाटर की खेती से इन सभी सवाल व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में जानते हैं।

Tamatar Ki Kheti Kaise Karen | टमाटर की खेती कब और कैसे करें | Tomato Ki Kheti

Tamatar Ki Kheti Kaise Karen

टमाटर की खेती कब करें (Tamatar Ki Kheti Kaise Karen)

किसी भी फसल की उन्नत खेती के लिए उसकी अनुकूल जलवायु काफी महत्वपूर्ण होती है। टमाटर की खेती का समय (Tomato ki Kheti) क्षेत्र की जलवायु के अनुसार अलग-अलग है। पहाड़ी इलाकों के लिए मार्च से अप्रैल का महिना बुवाई के लिए बेहतर रहता है। वहीँ अन्य क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन फसल के लिए नवम्बर-दिसंबर व शरदकालीन फसल हेतु जुलाई से सितम्बर का महीना अच्छा होता है। देश के लगभग हर क्षेत्र में टमाटर की खेती को किया जा सकता है।

टमाटर की खेती हेतु सही मिट्टी और जलवायु

जलवायु: यदि आप टमाटर की खेती कर अच्छी कमाई करने के बारे में विचार कर रहे हैं तो आपको इसकी अनुकूल जलवायु और मिट्टी की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। टमाटर की फसल को गर्म जलवायु में उगाया जाता है, अच्छी धुप वाले क्षेत्र इसके लिए लाभदायक होते हैं। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों की मृदु जलवायु इसकी खेती के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। ज्यादा बारिश टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन ठंडे मौसम में आप इसकी खेती सफलतापूर्वक कर सकते हैं, बस फसल के लिए अनुकूल तापमान होना अनिवार्य है। वैसे तो इसके लिए 21 से 23 डिग्री तापमान अनुकूल माना गया है, लेकिन व्यापारिक स्तर पर आप 18 से 27 डिग्री तापमान पर सफल उत्पादन कर सकते हैं।

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Tamatar Ki Kheti Kaise Karen

मिट्टी: फसल की उच्च गुणवत्ता के लिए मिट्टी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टमाटर की खेती हेतु रेतीली दोमट से चिकनी काली कपासीय मृदा अच्छी होती है, ध्यान रहे मिट्टी उचित जल निकास वाली और जैविक पदार्थ की पर्याप्त मात्रा वाली होनी चाहिए। मिट्टी का PH मान 6-7 होना चाहिए।

टमाटर की उन्नत किस्में (Advanced Varieties of tomatoes)

अगर हम टमाटर की उन्नत किस्मों की बात करें तो इसमें कई किस्में आती हैं जो कि नीचे टेबल में दी गई हैं।

अर्का सौरभपूसा दिव्यापूसा गौरव
पूसा संकर 1पूसा संकर 2पूसा संकर 4
पूसा रुबीपूसा शीतलपूसा उपहार
अर्का विकासए आर टी एच 3ए आर टी एच 4
अविनाश 2बी एस एस  90को. 3
एच एस  101एच एम 102एच  एस  110
सिलेक्शन 12पंत बहाररजनी
के एस 2रश्मीरत्न
हिसार अरुण (सिलेक्शन 7)रोमारुपाली

टमाटर की खेती करने का तरीका

  • किसान वर्षा ऋतु में जून-जुलाई व ठंड के मौसम में जनवरी-फरवरी में टमाटर की फसल हेतु बुवाई कर सकता है।
  • हल की मदद से अच्छी तरह खेत की जुताई करें।
  • इसके बाद कल्टीवेटर की मदद से आड़ी-तिरछी जुताई करें, इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाएगी।
  • खेत को समतल करने के लिए पाटा चला दें।
  • मिट्टी की जांच करने के बाद उसमें गोबर खाद व उर्वरक जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश को उचित मात्रा में मिट्टी में मिला दें।
  • बुवाई के लिए क्यारी का निर्माण 3 मीटर लम्बाई व 1 मीटर चौड़ाई के साथ करें।
  • जमीन से क्यारी की ऊंचाई 30 से.मी. रखना पर्याप्त होता है।
  • पौध को उचित खेत में 75 से.मी. की कतार की दूरी रखते हुये 60 से.मी के फासले पर पौधों की रोपाई करें।

सिंचाई व स्टेकिंग

सिंचाई: फसल की सिंचाई को ड्रिप इर्रीगेशन की मदद से करें। शीत ऋतू में आप 10-15 दिन के अन्तराल से फसल की सिंचाई करें व गर्मियों में 6-7 दिन के अंतर से सिंचाई करें।

Tomato Ki Kheti

टमाटर के पौधे की स्टेकिंग करें: टमाटर का पौधा कमजोर ताने वाला होता है, जिस वजह से फल आने पर यह जमीन से झुक जाता है। फल के जमीन से टकराने व पानी के संपर्क में आने की वजह से वह ख़राब हो जाता है। इससे बचने के लिए आप ध्यानपूर्वक स्टेकिंग करें। स्टेकिंग प्रक्रिया के अंतर्गत आपको पौधे के नजदीक बांस गाढ़कर उसे पतली रस्सी की मदद से बांस के उपरी सिरे पर बांध दें। सहारा देने की प्रक्रिया को ही स्टेकिंग कहा जाता है।

टमाटर की खेती के रोग एवं बचाव

हरा तैला, सफेद मक्खी, फल छेदक कीट एंव तम्बाकू की इल्ली टमाटर की फसल को प्रभावित करती है। इससे बचाव के लिए आप फ्लूक्लोरेलिन 1 किलो प्रति हेक्टेयर,  मेरिटेंजिन (सेन्फोर) 0.25 – 0.50 किलो प्रति हेक्टेयर, एलैक्लोर (लासों) 2 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से इस्तेमाल करें। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र पर संपर्क करें।

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