Ragi Ki Kheti: मडुआ (रागी) की खेती कैसे करें, जानें कीमत व इसके फायदे

रागी की खेती कैसे करें: भारत में बहुत से फल व अनाज ऐसे हैं, जिनकी डिमांड अचानक से बढ़ रही है। बढ़ती हुई डिमांड को देखते हुए किसान भी इन फसलों को अपने खेतों में स्थान दे रहे हैं। रागी, जिसका दूसरा नाम मडुआ भी है, अचानक बाज़ार में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए किसान इसकी खेती करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मंडी में रागी की कीमत भी काफी अच्छी मिल रही है और साथ ही इसकी खेती करना ज्यादा कठिन भी नहीं है। यानी रागी की खेती कर किसान कम मेहनत के ही अच्छी कमाई कर सकते हैं। मडुआ की खेती कब और कैसे करनी चाहिए, मंडी में बेचकर खेती करने से कितनी कमाई हो सकती है। कब इसकी खेती की जाती है, इसके फायदे क्या हैं, आइए मडुआ यानी रागी की खेती (Ragi Ki Kheti) से जुड़ी हर जानकारी के बारे में जानते हैं।

रागी (मडुआ) क्या है, इसकी खेती कैसे करें? (Ragi Ki Kheti)

एक प्रकार का मोटा अनाज है। पहले कहा जाता था कि यह सिर्फ गरीबों का ही भोजन है, लेकिन जब लोगों को इसके सेवन से गुणकारी लाभ दिखाई दिये तो अब अमीर व माध्यम वर्गीय लोगों ने भी रागी (मडुआ) का सेवन करना शुरू कर दिया। यह मोटा अनाज हमारे शरीर के कई रोगों के लिए फायदेमंद है। इसी वजह से अब हर वर्ग इसका सेवन करना चाहता है, जिससे की अचानक बाज़ार में इसकी मांग में तेजी आई है। यह पौष्टिक होने के साथ ही स्वादिस्ट भी है। रागी (मडुआ) से रोटी, ब्रेड, खीर, इडली आदि को बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।

रागी की खेती किस राज्य में होती है?

रागी यानी मडुआ की खेती भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक, ओड़िशा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश में ज्यादा की जाती है। बिहार राज्य के कुछ क्षेत्रों में भी रागी की खेती को किसान करना पसंद करते हैं।

जलवायुं व मृदा

गर्म मौसम वाले राज्यों में बिना किसी परेशानी के इसकी खेती की जा सकती है, रागी फसल के विकास के लिए औसतन तापमान 26 से 29 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। सभी तरह की उपजाऊ मिट्टी पर इसकी खेती की जा सकती है, लेकिन बलूई दोमट मिट्टी में इसकी फसल के परिणाम अच्छे देखने को मिले हैं। रागी की फसल को ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती और इस मिट्टी में जल निकास अच्छा होता है।

ऐसे करें खेत तैयार

  • ग्रीष्म ऋतू में फसल कटने के बाद सबसे पहले एक-दो बार खेत की गहरी जुताई करें।
  • मिट्टी से पिछली फसल के अवशेष व खरपतवार को नष्ट कर दें।
  • मानसून प्रारंभ होते ही एक-दो बार खेत की जुताई कर दें।
  • इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर दें।

आप रागी (मडुआ) की खेती करने के लिए ऐसे भूमि का चयन करें जहाँ, इसमें पानी लगने की गुंजाइश कम हो। इसकी बुबाई के लिए उपयुक्त समय की बात करें तो जुलाई-अगस्त को बेहतर माना जाता है। इसकी खेती करने का एक फायदा यह भी है कि आपको ज्यादा उर्वरक देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आप प्रति एकड़ के अनुसार 50 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस,  20 किलोग्राम पोटाश  का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बीज का चयन

अच्छी फसल के लिए सही बीजों का चयन कर बुबाई करें। जहां तक संभव हो प्रमाणित बीज का प्रयोग करें। रागी फसल की बुबाई के लिए सही समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई मध्य तक मानसून वर्षा होने तक है। छिंटवा विधि या कतारों में इसके बीज की बुवाई की जाती है। यदि आप कतार पद्धति से बुवाई करते हैं तो दो कतारों के बीच की दूरी 22.5 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखे। इसकी बुवाई के बाद ध्यान रखें की आपको रागी की फसल को कम से कम 45 दिनों तक खरपतवार से दूर रखना होगा। इससे आपकी फसल की मात्रा को हानि नहीं होगी।

रागी फसल की कटाई

आप ने रागी की किस फसल को बोया है उसके अनुसार ही आपको फसल की कटाई करना है। रागी की जिस किस्म को आप अपने खेत में बोया है वह कब पक कर तैयार होगी इसकी जानकारी के लिए आपने ग्राम के कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें। उनके द्वारा बताया गए समय के अनुसार ही अपनी फसल पकने के बाद कटाई करें। कटाई के लिए आपको पौधे में लगी बाली को दानों के साथ काटना होगा। बाली को काटने के बाद इनकी ढेरी बना लें और 3-4 दिन के लिए सूखने के लिए छोड़ दें। इसके बाद आप परंपरागत तरीके से गहाई व दानों की सफाई कर सकते हैं।

रागी फसल से कमाई व कीमत

यदि आप भी रागी (मडुआ) की खेती कर अच्छी कमाई करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आप आसानी से इसकी फसल उगाकर इसे मंडी में बेंच सकते हैं। मंडी में रागी किस्म के अनुसार 1800 से 2300 प्रति क्वीनतल के हिसाब से बिकती है, यानी फसल अच्छी निकलने पर आपकी कमाई भी अच्छी हो सकती है। इसकी फसल को ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, जिस वजह से कम पानी वाले क्षेत्र में भी रागी (मडुआ) की खेती को बिना किसी परेशानी के किया जा सकता है। भारत में काफी समय से इसकी खेती को किया जा रहा है। पूरे विश्व में रागी (मडुआ) की खेती करने में भारत का अच्छा स्थान है।

रागी (मडुआ) के फायदे

  • रागी (मडुआ) के कई गुण हैं और यह कई बीमारियों के लिए लाभदायक भी है।
  • इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्वोहाइड्रेट्स और फास्फोरस की अच्छी मात्रा पाई जाती है।
  • जिन लोगों को शुगर यानी मधुमेह की बीमारी है उन्हें रागी (मडुआ) का सेवन जरूर करना चाहिए क्यूंकि इससे उनकी शुगर कंट्रोल होती है।
  • इसमें कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है, जिस वजह से यह हड्डी के विकास के लिए लाभदायक है।
  • खून की कमी से होने वाले रोग एनीमिया के लिए भी इसका सेवन लाभदायक है।
  • रागी (मडुआ) का सेवन हाई ब्लडप्रेशर को भी कंट्रोल करता है।
  • यह हमारी पाचन क्रिया को भी फायदा पहुंचाता है।
  • जिन लोगों को अपना वजन कम करना है, उन्हें भी रागी (मडुआ) के सेवन की सलाह दी जाती है।

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