ओएस्टर (ढींगरी) मशरूम की खेती कैसे करें, मशरूम की खेती से होगी बंपर कमाई

Oyster Mashroom ki Kheti Kaise Kare: भारत में मशरूम की मांग और उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर किसानों को मशरूम की खेती के लिए प्रेरित कर रहा है। बहुत कम प्रयास में अच्छे मुनाफे के लिए मशरूम एक आदर्श विकल्प है। प्रशिक्षण लेकर यदि कोई इसकी खेती करता है, तो यह आपको करोडपति बना सकती है। इसी को देखते हुए मशरूम की खेती का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के द्वारा दिया जाता है। भारत में ओएस्टर (ढींगरी) मशरूम की खेती (Mushroom ki Kheti) ज्यादा होती है। कैसे आपको मशरूम की यह किस्म मालामाल बना सकती है। आइए जानते हैं, इसकी खेती कैसे करते हैं और इससे कितनी कमाई होती है।

Oyster Mushroom Cultivation Detail in Hindi

mushroom ki kheti

मशरूम की खेती (Mushroom Farming in Hindi)

भारत में मशरूम को खुम्भ, खुम्भी, भमोड़ी और गुच्छी भी कहा जाता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण और विटामिन जैसे पोषक तत्वों की भरमार है, इस वजह से भारत में इसकी मांग ज्यादा है। घरों में सब्जी के रूप में इस्तेमाल होने के साथ-साथ कम्पनियां भी मशरूम के कई उत्पाद बनाकर भारतीय बाज़ार में बेचती हैं। मशरूम के पापड़, जिम का सप्लीमेन्ट्री पाउडर, अचार, बिस्किट, टोस्ट, कूकीज, नूडल्स, जैम (अंजीर मशरूम), सॉस, सूप, खीर, ब्रेड, चिप्स, सेव, चकली भारत में मुख्य खाद्य उत्पादों के रुप में प्रचलित हैं।

भारत में मशरूम की खेती कहाँ होती है?

तीन तरह के मशरूम ज्यादा प्रचलित हैं, जिनमें बटन मशरूम (Button Mushroom) , ढिंगरी मशरूम /ओएस्टर मशरुम (Oyster Mushroom) और दूधिया मशरूम/मिल्की (Milky Mushroom) शामिल हैं। भारत में ढिंगरी मशरूम / ओएस्टर मशरुम सबसे ज्यादा प्रचलित है। इसकी खेती को वर्षभर किया जा सकता है। भारत के कई राज्यों में इसकी खेती की जाती है, जिनमें तमिलनाडु और उड़ीसा अग्रिम हैं। वहीँ राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश (MP), पश्चिम बंगाल, केरल, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में भी ओयस्टर (ढींगरी) मशरूम की खेती (Oyster Mushroom Ki Kheti) की जाती हैं। इसकी खेती के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकारें प्रशिक्षण के साथ ही खेती करने हेतु 50% अनुदान भी देती है।

ओएस्टर मशरूम का उत्पादन कैसे करें

अनुकूल जलवायु खेती का समय

ओयस्टर मशरूम को नमी और ठंडक की आवश्यकता होती है। सितम्बर से  नवंबर तक का मौसम इसके लिए उपयुक्त माना गया है, लेकिन भारत में पूरे साल ओयस्टर मशरूम की खेती होती है।

ओयस्टर मशरूम की खेती कैसे करें?

यदि आप ओएस्टर मशरूम लगाकर कमाई करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको उत्पादन कक्ष की आवश्यकता होगी। आप इन कक्षों का निर्माण कच्ची ईंट, पॉलीथीन तथा धान या अन्य फसल के पुआल सेकर सकते हैं। ध्यान रहे कक्षों में खिड़की और दरबाजे जालीदार होना चाहिए। इससे हवा का उचित आगमन हो सकता है। इसका उत्पादन फसल अवशिष्ट या भूसे से किया जा सकता है, बस ध्यान रहे यह सड़ी गली नहीं होनी चाहिए।

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भूसा तैयार करने की प्रक्रिया

ओएस्टर मशरूम के बीज को स्पॉन भी कहा जाता है। ध्यान रहे खेती के लिए स्पॉन को पहले से खरीदकर भंडारित न करें। इससे बीज सढ़ने की सम्भावना बढ़ जाती है। आप एक सप्ताह पहले मशरूम के बीजों को लेकर रख सकते हैं। कई संस्थानों पर इसके बीजों की बुकिंग पहले से करने की सुविधा उपलब्ध रहती है। इन्हें लगाने के लिए भूसा, पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन और बीज की आवश्यकता होती है। दस किलो भूसे के लिए एक किलो बीज की आवश्यकता होती है। इसके लिए पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन, की जरूरत होती है।

इस तरह करें ओएस्टर मशरूम की खेती  

  • सबसे पहले 100 लीटर पानी में 150 मिली. फार्मलिन, 7 ग्राम कॉर्बेंडाजिनअच्छी तरह घोल दें।
  • अब इसमें 10 किलो भूसा डुबोकर उसका शोधन करें।
  • इसे बारह घंटे तक भिगोकर रखें।
  • अब इसे निकालकर जालीदार बैग या फिर चारपाई पर फैला दें, इससे अतिरिक्त पानी निकाल जाएगा।
  • मशरूम उत्पादन के लिए आपने जिस कक्ष को तैयार किया है उसे 2 प्रतिशत फार्मलीन से उपचारित कर लें।
  • अब ओयस्टर मशरूम के ताजा बीज लें, ध्यान रहे ये ज्यादा पुराने नहीं होना चाहिए।
  • बुवाई के लिए 4 किलो गीले भूसे में 100 ग्राम बीज मिलकर इसे 4 किलो क्षमता वाली पोलिथीन में भर दें।
  • थैली को अच्छी तरह से दबा दें, इस बात का ध्यान रखें कि थैली के अंदर हवा ना जाए, इसके लिए इसे उपर से अच्छी तरह से मोड़कर बंद कर दें।
  • अब थैली के चारों और 5 मिमी. के 10-15 छेद कर दें।

बुवाई के बाद देख-रेख

  • बीज लगाने के बाद आपको अच्छी तरह से कक्ष में थैलियों की देख-रेख करना है।
  • इन थैलियों में फंगस लगने का डर रहता है, यदि एक थैली में भी फंगस लगती है तो यह दूसरी थैलियों को भी ख़राब कर देती हैं। इसलिए ध्यान रहे, थैली में हरा, काला या नीले रंग की फंगस दिखे तो इसे तुरंत बहार फेंक दें।
  • आपने जिक कक्ष में थैलियों को रखा है उसमें लगभग 4 से 6 घंटे तक प्रकाश आना चाहिए।
  • कक्ष में गर्मी है तो आप दीवारों पर पानी छिड़ककर में ठंडक पैदा कर सकते हैं।
  • थैलियों पर भी 2-3 दिन पानी का हल्का छिडकाव करते रहे।
  • 15 से 25 दिन बाद ओयस्टर मशरूम बाहर निकलने लगेंगी और आप इसकी पहली तुड़ाई कर सकते हैं।
  • पहली तुड़ाई के 8-10 दिन बाद आप इसकी दूसरी तुड़ाई कर सकते हैं।
  • इस तरह आप 3 बार इसका मशरूम का उत्पादन ले सकते हैं।

मंडी में कीमत और कमाई

ओएस्टर मशरूम / ढीगरी मशरूम की खेती में बहुत कम लागत के साथ अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। बाज़ार में मांग के अनुसार ढीगरी मशरूम की कीमत 200-250 रूपये प्रति किलो होती है। आप इसे मंडी या फिर सीधा कम्पनियों को भी बेच सकते हैं। यदि आप 1 टन ओयस्टर मशरूम का उत्पादन करते हैं तो इससे आप दो से ढाई लाख की कमाई कर सकते हैं।

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