लहसुन की खेती कब और कैसे करें, किसानों की होगी बंपर कमाई

लहसुन की खेती:  खेती को अगर अच्छी तरह से समझकर नई तकनीक के साथ किया जाये तो किसान कम लागत के साथ ही लाखों में कमाई कर सकता है। सही समय पर सही फसल का चुनाव कर आप खेती अच्छी कमाई कर सकते हैं, यही कारण है कि अब देश के युवा भी खेती की तरफ अपना रुझान दिखा रहे हैं। लहसुन की फसल को सबसे लाभकारी फसलों में से एक माना जाता है। लहसुन की खेती कर कोई भी महज महीने में लाखों की कमाई कर सकता है। लहसुन की खेती कब और कैसे करनी चाहिए, 1 बीघा जमीन पर इसकी खेती करने से कितनी कमाई हो सकती है। लहसुन की कितने प्रकार की किस्म होती है, कब इसकी खेती की जाती है, आइए लहसुन की खेती से जुड़ी हर जानकारी के बारे में जानते हैं।

लहसुन की खेती कब की जाती है? (Garlic Farming in India)

देश में लहसुन का इस्तेमाल चटनी, पाउडर, अचार समेत अन्य खाद्य योग्य उत्पादों हेतु किया जाता है। यही कारण है कि वर्षभर लहसुन की मांग रहती है। हालांकि इसकी खेती को क्षेत्र के अनुकूल मौसम के अनुसार की जाती है। उत्तर भारत क्षेत्र की बात की जाए तो यहां अक्टूबर-नवम्बर माह में लहसुन की बुवाई होती है। वहीँ पर्वतीय क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल माह में बुवाई का समय होता है। देश के हर क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है, लेकिन उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, हरियाणा, पंजाब और मध्‍य प्रदेश का मौसम इसकी फसल हेतु अनुकूल माना गया है।

कौन सी मिट्टी और जलवायु सही है? (Garlic Cultivation)

लहसुन की खेती हेतु ज्यादा गर्म जलवायु ठीक नहीं रहती, इसकी खेती के लिए थोड़ी शीतल जलवायु को बेहतर बताया गया है। मिटटी का सही चयन भी इस फसल के लिए जरूरी है। लहसुन की खेती को दोमट या फिर चिकनी मिट्टी पर किया जा सकता है, ये दोनों मिट्टियां सर्वश्रेष्ठ होती हैं। धयान रहे दोनों ही मिट्टियों में जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक होनी चाहिए, यह लहसुन की खेती के लिए लाभदायक साबित होगी। यदि आप लहसुन की बुवाई करने जा रहे हैं तो यह जांच लें कि खेत में नमी तो नहीं हैं, ऐसे स्थिति होने पर पहले खेत का पलेवा ज़रूर कर दें।

लहसुन की बुवाई कैसे करें? (Garlic Farming Techniques)

समतल क्यारियों में, मेंड़ों पर या पौधशाला में आप लहसुन की कलियों को रोपितकर इसकी खेती कर सकते हैं| पौधशाला में लहसुन की खेती का ज्यादा प्रचलन नहीं है, ज्यदातर क्षेत्रों में समतल क्यारियों और मेंड़ों पर ही इसकी खेती की जाती है| यदि आप समलत क्यारियों में लहसुन की खेती करते हैं तो इसकी कलियों को 10 से.मी.लाइन से लाइन तथा 7-8 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी पर रोपित करना चाहिए| यदि अगर आप मेंड़ों पर इसकी फसल उगाना चाहते हैं तो 40-45 से.मी चौड़ी मेंड़ बनाइए, जिसके बीच सिंचाई एवं जल निकलने हेतु 30 से.मी. की नाली जरूर बनाएं| बुवाई करते वक़्त मेंड़ों पर कलियों के बीच 10 से.मी. की दूरी अवश्य अवश्य रखिए|

लहसुन की खेती के लिए सिंचाई

लहसुन की फसल के लिए समय पर सिचाई करना अतिआवश्यक है| बुवाई के समय यदि खेत नमी नहीं है तो आप बुवाई के कुछ देर बाद ही हल्की सिंचाई कर सकते हैं, वहीँ अगर खेत में नमी है तो बुवाई के 1 सप्ताह बाद सिंचाई करना शुरू करें| नमी के अनुसार सिंचाई करते रहें| जब लहसुन की फसल परिपक्व हो जाये टैब खुदाई के 9-10 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें|

लहसुन की खेती करें जैविक खाद का इस्तेमाल

लहसुन की अच्छी फसल के लिए अच्छा खाद होना सबसे जरूरी है| आप जैविक खाद से अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं| यदि आप एक हेक्टेयर जमीन पर खेती कर रहे हैं तो मिटटी में जल संरक्षण की क्षमता को बढ़ाने के लिए बुवाई से 10-15 दिन पहले 250-300 कुन्तल गोबर की सड़ी खाद मिटटी में अच्छी तरह से मिला दें| इसके अलावा 80-100 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60-65 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 80-90 कि.ग्रा. पोटाश मिला दें|

कब करें लहसुन फसल की खुदाई

लहसुन फसल की खुदाई कब करना है, इसकी जांच आप पत्तियों के द्वारा कर सकते हैं| जब पौधों की पत्तियों का रंग पीला पड़ना शुरू हो जाए और वे गिरने लगें, तब लहसुन फसल की खुदाई का एकदम सही समय रहता है| खुदाई पूरी होने के पश्चात् आप लहसुन को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ धुप न आती हो| 7 दिनों तक आप अपनी फसल को किसी छायादार स्थान पर रख दें| इसके बाद कंदों से पत्तियों को 2.5 से.मी. छोड़कर काट देवें|

लहसुन की खेती से शानदार कमाई (Garlic Farming Profit)

यदि हम एक बीघा जमीन पर लहसुन की खेती करते हैं तो आप 7-8 कुन्तल लहसुन का उत्पादन कर सकते हैं| यदि मंडी में लहसुन का भाव 100-120 के आस-पास रहा तो आप 70-75 हजार रुपए की कमाई कर सकते हैं|

लहसुन की किस्में कितने प्रकार की होती हैं? (Garlic Varieties)

लहसुन की किस्में- एग्रीफाउंड सफेद, एग्रीफाउंड पर्वती, यमुना सफेद-1 (जी-1 ), यमुना सफेद-2 (जी-50), यमुना सफेद-3, सोलन, ये सभी लहसुन की मुख्य किस्में हैं|

Jai Jawan, Jai Kisan

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