एलोवेरा की खेती कैसे होती है, खेती करने का तरीका जानें और किसान एलोवेरा से करें बंपर कमाई

एलोवेरा की खेती कैसे होती है, सीखें खेती करने का तरीका: देश के किसान अपनी आय को बढ़ाने के लिए अब पारंपरिक खेती को कम कर दिया है। अब वे अन्य फसलों की खेती में भी अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। वे औषधीय अकरकरा की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसकी खेती कैसे की जाती है, इसके बारे में आपको जानकारी पहले ही दी जा चुकी है। यदि आपने यह जानकारी नहीं पढ़ी है, तो आप इसे यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। आज हम आपको औषधीय पौधे एलोवेरा (Aloe Vera Ka Paudha) के बारे में बताने जा रहे हैं। इसकी खेती कर किसानों ने शानदार कमाई कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारा है। एलोवेरा की खेती (Aloe Vera ki Kheti) कब और कैसे करें। इसकी सही तरह से खेती करने का तरीका क्या है? इससे कितनी कमाई कर सकते हैं? आइए एलोवेरा की खेती से जुड़ी हर जानकारी के बारे में जानते हैं।

Aloe Vera ki Kheti Detail In Hindi

Aloe Vera ki Kheti Detail In Hindi

एलोवेरा क्या है, इसकी खेती कैसे करें?

भारत में एलोवेरा एक औषधीय पौधे (Aloe Vera Ka Paudha) के रूप में जाना जाता है। इसके अन्य नाम घृत कुमारी, क्वारगंदल, ग्वारपाठा हैं। यह हरी रंग का गूदेदार पौधा होता है, जिसमें तना नहीं होता या होता है, तो बहुत ही छोटा होता है। इसकी पत्तियां बड़ी होती हैं, जिसके आस-पास कांटे होते हैं। इसकी कुछ किस्मों पर ग्रीष्म ऋतू के समय पीले रंग के फूल देखने को मिलते हैं। ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि एलोवेरा कितने प्रकार के होते हैं। आपको बता दें एक शोध के अनुसार यह पाया गया है कि एलोवेरा 300 प्रकार के होते हैं और 250 से अधिक में औषधीय गुण पाए जाते हैं। औषधीय गुणों वाली किस्म में मुख्य रूप से एलो बारबाडेन्सिस मिलर, मुसब्बर शामिल हैं।

एलोवेरा का उपयोग

सौंदर्य को निखारने में यह बहुत लाभदायक है, जिस वजह से सालभर इससे बने उत्पादों की मांग बाज़ार में बनी रहती है। इसलिए आसानी से एलोवेरा के खरीदार मिल जाते हैं। हर्बल और कास्मेटिक्स प्रोडक्ट के निर्माण हेतु कम्पनियां सीधा किसानों से एलोवेरा खरीदती हैं। इसका उपयोग एलोवेरा फेस वॉश, एलोवेरा क्रीम, एलोवेरा फेस पैक, दन्त मंजन समेत अन्य सौन्दर्य उत्पादों के लिए किया जाता है। औषधीय गुण से संपन्न होने के कारण दवा निर्माता कम्पनी भी इसे ऊँचे दाम पर किसानों से खरीदती हैं। आइए आगे जानते हैं कि एलोवेरा की खेती कैसे किया जाता है, इसकी खेती के फायदे क्या हैं और आप इससे कितनी अच्छी कमाई कर सकते हैं। 

एलोवेरा की खेती की जानकारी

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भारत में एलोवेरा की खेती कहां होती है?

वैसे तो सभी राज्यों में एलोवेरा की खेती को सफलतापूर्वक किया जा सकता है। मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इसकी खेती अधिक होती है।

एलोवेरा की खेती हेतु सही मिट्टी और जलवायु

जलवायु: एलोवेरा के लिए उष्ण जलवायु अनुकूल होती है। न्यूनतम वर्षा और गर्म आर्द्र क्षेत्र में भी इसकी खेती को किया जाता है। ज्यादा ठंडे वातावरण का इसकी खेती पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

मिट्टी: इसके लिए भूमि का पीएच (P.H.) मान 8.5 होना होना चाहिए। एलोवेरा की खेती को आप रेतीली से लेकर दोमट मिट्टी समेत भारत में पाई जाने वाली अन्य मिट्टी में भी कर सकते हैं। खेत में जल निकासी हेतु अच्छी व्यवस्था करें, क्योंकि जल भरव से सफल को नुकसान पहुँचता है।

एलोवेरा की खेती कब और कैसे करें

  • जुलाई-अगस्त का महीना एलोवेरा की बुवाई के लिए सबसे अनुकूल रहता है। आप सर्दी का महीना छोड़कर आप कभी भी इसकी बुवाई कर सकते हैं।
  • इसकी बिजाई 3-4 महीने पुराने चार-पांच पत्तों वाले कंदो के द्वारा की जाती है।
  • बुवाई से पहले मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए अच्छी तरह से खेत की जुताई कर दें
  • जुताई के बाद 10 से 15 गोबर से निर्मित खाद को अच्छी तरह से मिट्टी में मिला दें।  
  • पौधों की लाइन से लाइन की दूरी 1 मीटर व पौधे से पौधे की दूरी 40 सेंटीमीटर रखें।

आवश्यकतानुसार करें सिंचाई

इसकी पहली सिंचाई बिजाई होने के तुरंत बाद कर दें। इसे कम पानी की आवश्यकता होती है, जिस वजह से रोजाना सिंचाई करने की जरुरत नहीं होती। आप समय-समय पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहे। इससे एलोवेरा में जेल की मात्रा में वृद्धि होती है। आप सप्ताह में एक बार इसकी सिंचाई कर सकते हैं।

जानें एलोवेरा की खेती का पूरा वर्णन इन हिंदी

एलोवेरा पौधे के रोग एवं बचाव

एलोवेरा पौधे में कोई ख़ास प्रकार का रोग नहीं लगता, लेकिन अधिक सिंचाई और जलभराव की वजह से कई बार इसकी जडें सड़ने लगती हैं। इसलिए मिट्टी सुखी दिखाई देने पर ही इसकी सिंचाई करें। वहीँ जलभराव से बचने के लिए खेत में जल निकास की बेहतर व्यवस्था रखें।

लागत, कमाई व खरीदार

लागत: एक हेक्टेयर में एलोवेरा की बीजी करने का खर्च 25 हजार से 30 हजार के आसपास आता है। मजदूरी, खेत तैयारी करना, खाद के खर्च समेत यह लागत पचास हजार रूपए तक पहुँच जाती है।

एलोवेरा की खेती से शानदार कमाई

कमाई: एलोवेरा की खेती बेहद ही फायदेमंद है। यदि आप एक हेक्टेयर में इसकी खेती करते हैं, तो इससे लाखों की कमाई कर सकते हैं। एक हेक्टेयर में करीब 40 से 45 टन का उत्पादन होता है। मंडी में इसका भाव 15 हजार से 25 हजार  रुपए प्रति टन रहता है। ऐसे में आप आसानी से वर्षभर ग्वारपाठा की खेती कर 10 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। पहले वर्ष के बाद अगले 2-3 सालों में इसके उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे आपकी कमाई भी बढ़ती है। हालाँकि चौथे व पांचवें वर्ष में उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की गिरवट देखने को मिल सकती है।

खरीदार: इसकी खेती शुरू करने से पहले आप यह जरूर सोचते होंगे कि एलोवेरा को कहां बेंचे? आप एलोवेरा की पत्तियों को मंडी में आसानी के साथ बेच सकते हैं। वहीँ आप कम्पनी से संपर्क कर कांट्रेक्ट आधारित खेती भी कर सकते हैं। दवा बनाने वाली कुछ कंपनियां किसानों से अकरकरा की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कराती हैं। इसके अलावा एलोवेरा पर आधारित उत्पाद बनाने वाली कम्पनी डाबर, पंतजलि, समेत अन्य आयुर्वेदिक कंपनियां इसकी खरीदी करती हैं। आप अपने नजदीकी कृषि विभाग पर जाकर कम्पनी को एलोवेरा खरीदने वाली कम्पनी से सम्बंधित जानकारी जैसे कम्पनी का फ़ोन नंबर व ईमेल प्राप्त कर सकते हैं।

एलोवेरा के फायदे

  • इसके आयुर्वेदिक गुण अनगिनत हैं, यह कई बीमारियों के लिए लाभदायक है।
  • एलोवेरा, बदन दर्द, सिर दर्द के लिए बेहद ही हितकारी है। हल्दी के साथ इसके इस्तेमाल से दर्द में आराम मिलता है।
  • कान के दर्द के लिए भी यह बेहत लाभदायक है।
  • चेहरे पर लगाने से यह आपकी कांति को बढ़ाता है।
  • चेहरे की चमको को बढ़ाने के साथ ही यह पिम्पल्स, दाग, धब्बों को भी दूर करता है।
  • इससे निकलने वाला गूदा खांसी-जुकाम के लिए लाभदायक है।
  • इसका सावन पेट से जुडी कई बीमारियों को दूर करता है।
  • पीलिया का इलाज करने के लिए भी एलोवेरा का सेवन करना फायदेमंद होता है। 
  • एलोवेरा की जड़ से काढ़ा बनाकर इसका सेवन करने से बुखार दूर हो जाता है।

Jai Jawan, Jai Kisan

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