Akarkara ki Kheti: औषधीय अकरकरा के पौधे की खेती से बंपर कमाई, जानें मंडी का भाव

Akarkara ki Kheti Kaise Kare: किसान अपनी आय को बढ़ाने के लिए अब भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलों की खेती को अपना रहा है। सरकार भी किसानों को अन्य फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जिन सब्जियों और फलों को भारत आयात किया करता था, अब तकनीकी मदद से देश में ऐसी फसलों की खेती भी सफलतापूर्वक की जा रही है। अब देश में औषधीय पौधों की खेती का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। क्योंकि इनकी खेती से किसानों की शानदार कमाई हो रही है। इस समय किसान औषधीय पौधे अकरकरा की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। मंडी में अकरकरा की जड़ को ऊँची कीमत में बेच कर किसान मालामाल बन रहे हैं। अकरकरा की खेती कब और कैसे करें, 1 बीघा जमीन पर इसकी खेती करने से कितनी कमाई हो सकती है, मंडी में यह क्या भाव पर बिकता है? आइए अकरकरा की खेती से जुड़ी हर जानकारी के बारे में जानते हैं।

Akarkara ki Kheti (Cultivation)

akarkara ki kheti

अकरकरा क्या है, इसकी खेती कैसे करें?

अकरकरा, यह एक औषधीय पौधा है, इसकी जड़ बेहद गुणकारी होती है। अकरकरा की जड़ का इस्तेमाल दंतमंजन, दर्द और थकान की आयुर्वेदिक दवा बनाने में किया जाता है। यह मानव शरीर के कई रोग जैसे सर्दी-जुकाम, लकवा आदि के लिए लाभदायक होती है। इसके आयुर्वेदिक गुण अनगिनत हैं, यही कारण है कि आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कम्पनियां अकरकरा की जड़ को मंडी से ऊंचे भाव में खरीदती हैं। इस समय देश में मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश इसकी खेती करने में अग्रिम हैं।

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अकरकरा की खेती हेतु सही मिट्टी और जलवायु

जलवायु: यदि आप भी अकरकरा की खेती कर अच्छी कमाई करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको इसके अनुकूल जलवायु और मिट्टी की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। इस फसल के लिए सम शीतोष्ण जलवायु सर्वश्रेष्ठ होती है। ऐसी जलवायु इसके विकास के लिए बेहतर होती है। इसकी फसल ज्यादा सर्दी भीषण गर्मी से ज्यादा प्रभावित नहीं होती। ध्यान रहे छायादार स्थान पर इसकी खेती ना करें, इससे फसल अच्छी तरह विकसित नहीं हो पायेगी।

मिट्टी: इसके लिए भूमि का पीएच (P.H.) मान सामान्य होना चाहिए। मिट्टी भी इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अकरकरा की खेती हेतु जल निकास वाली मिट्टी बेहतर होती है। साथ ही खेत की मिट्टी भुरभुरी और नरम होनी चाहिए, जिससे की पैदावार अच्छी हो सके।

Akarkara ki Kheti- आवश्यक तापमान

  • पौधे को अंकुरित होने हेतु आवश्यक तापमान – 20 से 25 डिग्री
  • अकरकरा पौधे के विकास हेतु जरूरी तापमान – न्यूनतम 15 और अधिकतम 30 डिग्री
  • पौधे के पकने के समय आवश्यक तापमान – 35 डिग्री

अकरकरा की खेती कब और कैसे करें

  • अकरकरा की बुवाई हेतु अक्टूबर-नवंबर का महीना सबसे बेहतर रहता है।
  • आप सीधा बीज या पौधे के माध्यम से इसकी बुवाई कर सकते हैं।
  • बुबाई करने से पहले खेत की गहरी जुताई करें और इसे कुछ दिनों तक ऐसा ही खुला छोड़ दें।
  • अब मिट्टी में गोबर से निर्मित खाद को अच्छी तरह से मिला दें।  
  • इसके बाद खेत में पानी लगा कर पलव कर देवें।
  • पलेव करने के कुछ दिन पश्चात् जब खेत की ऊपरी मिट्टी से नमी कम होने लगे तब दोबारा खेत की जुताई कर दें।
  • यदि आप बीजों से इसे उगाना चाहते हैं तो इन्हें पहले गोमूत्र से उपचारित कर लें, जिससे इसमें रोग लगने का खतरा कम हो जावेगा।
  • खेत में मेड से मेड के बीच की दूरी एक फीट रखें।
  • दो से तीन सेंटीमीटर गहरे गद्दे में बीजों की बुबाई करें।
  • बीज से बीज की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें।

Akarkara ki Kheti- पौधे लगाने की प्रक्रिया

  • यदि आप पौधे के द्वारा इसे उगाना चाहते हैं तो जिगजैग तरीके से इन्हें लगायें।
  • पौधों के बीच 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
  • 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई में ही इन पौधों को रोपित करें।
  • यदि आप शाम के वक़्त इन पौधों को रोपित करते हैं तो यह समय सबसे बेहतर है, इस समय अकरकरा के पौधे अच्छी तरह अंकुरित होते हैं।

Akarkara ki Kheti- फसल की सिंचाई

पौधे व बीज लगाने के तुरंत बाद खेत की सिंचाई कर दें। इससे आसानी से पौधे अंकुरित हो जाएंगे। प्रथम सिंचाई के बाद खेत में नमी बरक़रार रखने के लिए हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें। पौधों के अंकुरित होने के बाद 20 से 25 दिन तक पानी देते रहें।

अकरकरा पौधे के रोग एवं बचाव

अकरकरा पौधे में कोई ख़ास प्रकार का र्प्ग अब तक देखने को नहीं मिला है, लेकिन जलभराव की वजह से कई बार इस फसल को नुकसान पहुंचा है। जलभराव की वजह से इसकी इसके पौधे सड़ने लगते हैं। इस वजह से जलभराव की स्थिति से बचना चाहिए।

कब करें खुदाई

  • करीब 5 से 6 माह के बाद अकरकरा के पौधे खुदाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
  • जब यह पौधा पूरी तरह से पक जाता है तब ये सूखने की स्थिति में होते हैं और इसकी पत्तियां पीले रंग की पड़ जाती हैं।
  • पौधों को सावधानीपूर्वक निकाल कर जड़ को अलग कर दें।
  • इस जड़ को 2-3 दिनों के लिए छायादार स्थान पर रख दें।
  • इसके बाद इन्हें धुप दिखाकर सुखा लें और अब ये बाज़ार में बिकने के लिए तैयार हो गई हैं।

अकरकरा की खेती से किसानों की शानदार कमाई

इसकी फसल बेहद की कम समय में आपको लाखों रूपए कमाकर दे सकती है। 5 से 6 माह में इसकी फसल पक कर तैयार हो जाती है। अकरकरा की जड़ के मंडी भाव को देखें तो इसकी बिक्री 20 हजार रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से होती है। यदि आप एक एकड़ में इसकी खेती करते हैं तो 8 से 10 क्विंटल तक जड़े प्राप्त होती हैं। इसके अलावा डेढ़ से दो क्विंटल तक बीज भी प्राप्त होते हैं जिनका इस्तेमाल आप दोबरा इस फसल को उगाने में कर सकते हैं। यानी एक एकड़ से अकरकरा की खेती कर किसान आसानी से 2-3 लाख की कमाई कर सकता है। दवा बनाने वाली कुछ कंपनियां किसानों से अकरकरा की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कराती हैं।

अकरकरा की जड़ के फायदे

  • इसके आयुर्वेदिक गुण अनगिनत हैं, यह कई बीमारियों के लिए लाभदायक है।
  • यदि आप सिर दर्द से परेशान हैं, तो इसकी जड़ के इस्तेमाल से आपका सिरदर्द छूमंतर हो जाएगा। अकरकरा की जड़ को पीस कर इसे हल्का सा गर्म कर लें और अपने मस्तक पर लेप लगा लें, इससे आपका दर्द कम हो जाएगा।
  • अकरकरा का फूल चबाने से सर्दी जुखाम में काफी फायदा मिलता है।
  • दंड के दर्द में राहत देने के लिए भी यह लाभदायक है।
  • यदि आपके मुहं से बदबू आती है तो यह उसे भी कम करता है।
  • अकरकरा-मूल-चूर्ण को शहद के साथ चाटने से हिचकी दूर होती है।

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